प्रशासनिक ढांचा

चम्पावत की प्रतिकूल भौगोलिक स्थिति, बिखरी हुई आबादी और बीहड़ स्थलाकृतिक परिस्थितियों को देखते हुए पिथौरागढ़ और नैनीताल जिलों को काटकर 15.9.1997 को यह जिला अस्तित्व में आया। 2001 की जनगणना तक, यहाँ केवल एक तहसील चंपावत थी, हालांकि चंपावत से तीन नई तहसीलों के निर्माण के साथ, 2011 की जनगणना में तहसीलों की संख्या चंपावत, पाटी , लोहाघाट और पूर्णागिरी चार हो गई ! विकास उद्देश्यों हेतु जिसे आगे चार विकास खण्डो में विभाजित किया गया है। जिले में कुल 705 गांव हैं, जिनमें से 632 आबाद, 55 निर्जन और 18 वन गांव हैं। जिले में 313 ग्राम पंचायत हैं। 2001-2011 के दशक के दौरान, 146 गांवों के साथ नई तहसील पाटी, 287 गांवों के साथ लोहाघाट तथा तहसील चंपावत से 81 गांवों को स्थानांतरित करके एक और पूर्णागिरि तहसील भी बनायी गयाी । चंपावत जिले में टनकपुर, चंपावत, लोहाघाट और बनबास चार शहर हैं।

बाराकोट तहसील के निर्माण के बाद चंपावत जिले को पांच तहसीलों, दो उप-तहसीलों और चार विकास खंडों में विभाजित किया गया है। आम जनता की स्वास्थ्य आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए जिले मे 19 ऐलोपैथिक अस्पताल, 25 आयुर्वेदिक अस्पताल, 5 होम्योपैथिक अस्पताल, 3 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र और 2 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र हैं। शिक्षा तक आसान और सस्ती पहुंच प्रदान करने के लिए, 637 जूनियर बेसिक विद्यालय, 157 सीनियर बेसिक विद्यालय, 137 माध्यमिक और उच्च माध्यमिक विद्यालय, 3 कॉलेज और 3 पीजी कॉलेज हैं।

चंपावत जिला पूर्व में पड़ोसी देश नेपाल की सीमा पर पड़ता है और महाकाली नदी से अलग होता है ! पिथौरागढ़ इसके उत्तर में, पश्चिम में अल्मोड़ा तथा नैनीताल और दक्षिण में उधम सिंह नगर जिले इसकी सीमा पर स्थित हैं ।

(9-मार्च -2018 को डी.ई.एस.टी.ओ द्वारा दिए गए डाटा के अनुसार अपडेट किया गया)